माँ की ममता एक भावुक कहानी

माँ की ममता एक भावुक कहानी

दोस्तों एक गाँव में अनिल नाम का एक लड़का रहता था। लड़का एक सरल और सीधे स्वभाव का था। वह बहुत छोटा था जब उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण उनके घर (home) की स्तिथि बहुत ख़राब हो गई थी।

माँ (mother) की ममता और पिता की क्षमता का अंदाजा लगाना भी संभव नहीं है।

अनिल की माँ (mother) ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी इसलिए उनको कोई अच्छी नौकरी नही मिली और वो लोगो के घर (home) जाकर काम करके किसी तरह अनिल को पढ़ा लिखा रही थी। अनिल बहुत ही शर्मीले मिजाज का लड़का था और ज़्यादातर वो चुपचाप बैठा रहता था।

एक दिन अनिल जब स्कूल से घर (home) पंहुचा तो उसने अपनी माँ (mother) को एक चिट्ठी दी और कहा की माँ (mother) ये चिट्टी मुजको मेरे सर ने दी है देखो इसमें क्या लिखा है। माँ (mother) ने उस चिट्टी को मन ही मन पढ़ लिया और फिर अनिल को बताया की बेटा (son) इसमें लिखा है की आपका बच्चा पढाई में बहुत तेज़ है और हमारे यहाँ ऐसे अध्यापक नहीं जो आपके लड़के को पढ़ा सके, आप अनिल को किसी अच्छे स्कूल में भेजे तो आपके लिए अच्छा रहेगा।

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यह बात सुन का अनिल खुश हो गया और आत्मविश्वास से भर गया वो अब मन ही मन सोचने लगा की वो दुसरे सभी लडको से अलग है, वो सोचने लगा की उसमे कुछ तो ऐसी बात है जो ओरो में नहीं है।

वो बस माँ (mother) और बहन ही है जिनका प्यार हमारे लिए कभी भी ख़तम नहीं होता।

अब माँ (mother) ने अनिल का दाखिला किसी दुसरे स्कूल में करवा दिया और वहा अनिल खूब मन लगाकर आत्मविश्वास से पढाई करने लगा। आगे चलकर उसने सिविल सर्विस परीक्षा पास की और IAS ऑफिसर बन गया। अनिल की माँ (mother) की उम्र अब काफी ज्यादा हो गई थी और दवाइया भी लेने लगी थी। फिर एक दिन ऐसा आया की अनिल की माँ (mother) की मृत्यु हो गई। अनिल के लिए यह बहुत बड़ा सदमा था, वह रोने लगा और सोचने लगा की वह अब अपनी माँ (mother) के बिना कैसे जियेगा।

रोते रोते वह अपनी माँ (mother) की अलमारी के पास पंहुचा और उसको खोलकर उसमे रखा उसकी माँ (mother) का चस्मा, माला और सभी चीज़े लेकर उन्हें देख देख कर और जोर से रोने लगा। उस अलमारी में अनिल के कपडे, खिलोने सभी चीज़े संभाल के रखे हुए थे। देखते देखते उसकी नजर एक चिट्टी पड़ी, ये वही चिट्ठी थी जो उसके अध्यापक ने 20 साल पहले उसको दी थी।

स्कूल का वो बस्ता मुझे फिर से थमा दे माँ (mother),

यह जिन्दगी का सफ़र मुझे बड़ा मुस्किल लगता है।

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अपने आशू पोछ कर अनिल उस चिट्ठी को पढने लगा ( आदरनीय अभिभावक, आपका लड़का पढाई में बहुत ही कमजोर है और यहाँ तक की ये खेल कूद में भी भाग नहीं लेता है ऐसा लगता है की उम्र के हिसाब से इसकी बुद्धि विकसित नहीं हुई। हम इसे अपने स्कूल में और ज्यादा नहीं रख सकते अतः आपसे नेवदन है की आप इसका दाखिला किसी अन्य स्कूल में कराये या फिर आप इसे घर (home) पर ही पढाये।

दोस्तों आपको क्या लगता है की भगवान के माँ (mother) को क्यों बनाया, क्योकि भगवान सभी जगह नही हो सकते इसलिए भगवान का दुसरा रूप माँ (mother) है। माँ (mother) से बढ़कर कोई भी नहीं है। माँ (mother) हमारे लिए कितनी कुर्बानिय देती है यहाँ तक की संतान चाहे कितना भी बुरा व्यव्हार करे फिर भी माँ (mother) उसका भला ही सोचती है।

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