माँ का प्यार | Mothers Love

माँ का प्यार | Mothers Love

माँ (mother) के बारबार मना करने के बाद भी एक दिन लोकेश के मामा ने अपनी बहन को मोबाइल फ़ोन उपहार स्वरुप दे दिया।

अब मोबाइल फ़ोन हाथ में पकड़ कर माँ (mother) उलझन में पड़ गयी, उन्हें तो मोबाइल के बारे में कुछ भी पता नहीं था। काफी कोशिश की लेकिन कुछ समझ नहीं आया, तो सोचा लोकेश जब शाम को घर (home) आएगा तो पूछ लूंगी।

शाम को लोकेश ने भी बड़े ही प्यार से माँ (mother) को मोबाइल इस्तेमाल करने के तरीके समझा दिए। माँ (mother) भी खुश सी लग रही थी कि चलो अब जब चाहे जिस से बात कर पायेगी।

सुबह जब लोकेश ऑफिस चला गया तो वो मोबाइल ले बैठ गयी, सोचा अपने भाई से बात करती हुँ। लेकिन जैसे ही मोबाइल हाथ में आया तो वो उसे कैसे चलना है सब भूल गयी। बहुत से बटन दबाए के देखे लेकिन मोबाइल महाशय चालु हो नहीं हुए। सोचा आज फिर लोकेश से पूछूँगी।

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शाम को फिर लोकेश ने उन्हें समझा दिया और अभ्यास करने को कहा। अपने सामने सब बटनों के उपयोग भी बता दिए।

मगर अगले दिन माँ (mother) ने जब मोबाइल हाथ में फिर पकड़ा तो वो चालु तो हो गया लेकिन वो फिर भूल गयी की नंबर कैसे मिलाएँ। काफी कोशिश के बाद भी जब किसी से बात नहीं हुई तो सोचा आज फिर लोकेश से समझना पड़ेगा।

शाम को जब फिर उन्होंने मोबाइल सिखाने की बात की तो लोकेश को गुस्सा आ गया, बोला ” कितनी बार समझा दिया, अब क्या रोज़ रोज़ यही करता रहूँ।” और गुस्से में अपने कमरे में चला गया।

माँ (mother) को ये सुन बहुत दुःख हुआ। लेकिन चुप रह गयी।

कुछ देर बाद माँ (mother) के मोबाइल की घंटी बजने लगी। माँ (mother) ने उठा तो लिया लेकिन समझ नहीं आया कि किस बटन को दबाने से बात कर पायेगी। काफी देर जब घंटी बजती रही तो लोकेश कमरे से निकला और माँ (mother) के हाथ से मोबाइल ले बात करने लगा।

” हेलो।” लोकेश के मामा का फ़ोन था।

” अरे मामा, तुमने मुझे कहाँ फंसा दिया। माँ (mother) दिन भर मेरा दिमाग ख़राब कर देती है। कितनी बार तो समझा दिया कि मोबाइल को कैसे इस्तेमाल करना है लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आता।”

मामा ने भी हँसते हुए दुबारा समझने को कह दिया। मामा भाँजे में बातचीत तो ख़तम हो गयी, फ़ोन भी बंद हो गया।

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अभी लोकेश अपने कमरे में जाने को मुड़ा ही था कि माँ (mother) ने कहा ” शाबाश बेटा (son), शाबाश। अब मेरी नासमझी की बातें तुझे चुभती है। दो बार मोबाइल के बारे में बता कर तू समझता है तू फँस गया और मामा से शिकायत करने लगा।” ” जब तू छोटा था और बार बार गिरता था तो मैंने तो हमेशा ही प्यार से चलना सिखाया, कभी किसी से शिकायत नहीं की।” ” हमेशा रात सोते हुए डर कर उठ जाता था तो हमेशा मैं ही तुझे दुबारा सुलाती थी लेकिन मैंने तो कभी नहीं सोचा की मैं फँस गयी।” ये सब कह माँ (mother) की आँखों में आँसू आ गए।

लोकेश तो हैरान सा मुँह फाड़े माँ (mother) को देख रहा था। कुछ बोल तो नहीं पाया बस आगे बड़ माँ (mother) को आगोश में ले रो पड़ा। कुछ देर बाद उसके मुँह से कुछ शब्द निकले।

” माँ (mother), मुझे माफ़ कर दो, मैंने गलती से आपका दिल दुखाया है। आपका प्यार तो मेरे लिए दुनिया का सबसे बड़ा उपहार है।”

इस कहानी से आपको भी सीख लेनी चाहिए। माता पिता का प्यार बहुत ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है। लेकिन जब उनकी उम्र बढ़ जाए तो उन्हें उतना ही प्यार करना हर बच्चे का कर्त्तव्य है।

सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, दिल से उनको प्यार दें, सेवा करें।

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