Story of Tenali Raman – Flood Affected Fund – तेनाली राम की हिंदी कहानिया – बाढ़ पीड़ित फंड

Story of Tenali Raman – Flood Affected Fund – तेनाली राम की हिंदी कहानिया – बाढ़ पीड़ित फंड

एक बार विजय नगर (vijay nagar) राज्य में भयंकर वर्षा हुई जिसके कारण पूरे राज्य में बाढ़ आ गई जिसने तबाही मचा डाली । अनेकों घर पानी में बह (water flow) गए । हजारों पशु बाढ़ की भेंट चढ़ गए ।

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इस विपदा की खबर राजा कृष्णदेव (raja krishandev) राय को मिली तो उन्होंने तुरन्त मंत्री को बुलाकर आदेश दिया: ”तुरन्त बाढ़ पीड़ितों की सहायता (help of flood victim) की जाए । उनकी चिकित्सा, खाने और रहने की व्यवस्था की जाए और इस कार्य के लिए जितने भी धन की आवश्यकता (need of money) हो, वह राजकोष से अविलम्ब ले लिया जाए ।

नदी नालों पर पुल बनाएं जाएं तथा उसी प्रकार की और दूसरी व्यवस्था की जाए जिससे प्रजा को राहत मिले ।” मंत्री ने महाराज (king) को आश्वासन दिया और राजकोष से तुरन्त भारी रकम निकलवाकर सहायता (help) के कार्य में जुट गया । उस दिन के बाद से कई हफ्तों तक मंत्री जी राजधानी (capital) में दिखाई न दिए ।

महाराज व दूसरे लोग आश्वस्त थे कि मंत्री जी जोर-शोर से राहत कार्यों (relief work) में जुटे हैं । उधर तेनालीराम भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं थे । करीब एक महीने बाद प्राकृतिक आपदा राहत मंत्री दरबार में पधारे और महाराज को राहत कार्य (work report) की रिपोर्ट देने लगे । अपने काम की उन्होंने खूब बढ़ा-चढ़ाकर प्रशंसा की ।

जब दरबार की कार्यवाही समाप्त (finish) हो गई तो सभी के जाने के बाद महाराज ने तेनालीराम से कहा: ”तेनालीराम! यह मंत्री काफी कर्मठ हैं । एक माह में ही बाढ़-पीड़ितों के दुख-दर्द (help people) दूर कर दिए ।”  ”आप ठीक कहते हैं महाराज-क्यों न एक बार आप भी चलकर देख लें कि मंत्री जी ने कैसे और क्या-क्या प्रबंध किए हैं-प्रजा आपको अपने बीच देखेगी तो उनका काफी मनोबल (motivate) बढ़ेगा ।”

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”बात तो तुम्हारी ठीक है ।” महाराज ने फौरन सहमति (quick acceptence) दे दी । अगले ही दिन महाराज कृष्णदेव राय और तेनालीराम अपने-अपने घोड़ों पर सवार होकर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र (floow affected area) की ओर निकल गए । रास्ते में राजा का बाग था । उन्होंने देखा कि बाग के बहुत से कीमती वृक्ष (precious trees) कटे हुए हैं ।

”ये पेड़ किसने काटे हैं ।” ”महाराज! या तो तेज हवा (strong wind) से टूट गए होंगे या बाढ़ बहाकर ले गई होगी ।” चलते-चलते वे एक नाले पर जा पहुंचे । उस स्थान पर पुल के नाम पर कटे हुए पेड़ों के दो तने रखे थे । ”अरे! क्या इस मंत्री के बच्चे ने ऐसे ही पुल बनाए हैं । ये तने तो शाही बाग के पेड़ों (tree) के लगते हैं ।”

”महाराज! हो सकता है कि ये तने बाढ़ के पानी (flood water) में बहकर स्वयं ही यहां आकर अटक गए हों । आगे चलिए आगे अवश्य ही मंत्री जी ने अच्छे पुलों का निर्माण (development of bridge) कराया  होगा ।” मगर सभी जगह वही हाल था । वे जैसे-तैसे एक गांव में जा पहुंचे । गांव का बहुत-सा भाग अभी पानी में डूबा (dip in water) हुआ था ।

जिस स्थान से बाढ़ का पानी (flood water) निकल गया था, वहां गंदगी फैली थी । जगह-जगह मरे हुए जानवर सड़ (dead rotten animals) रहे थे । जिसके कारण ऐसी दुर्गंध फैली (smell) हुई थी कि सांस लेना भी दूभर हो रहा था । लोग अभी तक पेड़ों (trees) पर मचान बनाकर रह रहे थे । खाने की कौन कहे, पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं थी ।

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यह सब देखकर महाराज का खून खौल (king getting angry) रहा था । उधर, तेनालीराम अलग आग में घी डाल रहे थे ।  ”देखिए महाराज! मंत्री जी ने इन लोगों को सदा के लिए पेड़ों पर बसा दिया है, अब चाहे कितनी भी बाढ़ (flood) आए इनका पांव भी गीला नहीं होगा । इससे बेहतर राहत कार्य और भला क्या हो सकता है ।”

“तेनालीराम-तुमने यहां लाकर हमारी औखें खोल (open my eyes) दीं । इस मंत्री को हम ऐसा दण्ड देंगे कि जीवन भर याद (remember whole eyes) रखेगा । चलो, तुरन्त वापस चलो ।” दूसरे दिन दरबार लगा, महाराज ने अपना आसन ग्रहण करते ही मंत्री को आड़े हाथों लिया और खूब फटकार (shout) लगाई, फिर बोले: ”राजकोष से जितना पैसा (money from rajkosh) तुमने लिया है, अब उससे दोगुना (spend double) तुम्हें इस कार्य पर खर्च करना होगा और इस काम में खर्च होने वाली एक-एक पाई का हिसाब तेनालीराम रखेंगे ।”  महाराज का यह आदेश सुनते ही मंत्री महोदय का चेहरा लटक गया ।

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