मत करे श्री कृष्ण की पीठ के दर्शन | Mat Kare Shri Krishna ki Peeth ke Darshan

मत करे श्री कृष्ण की पीठ के दर्शन | Mat Kare Shri Krishna ki Peeth ke Darshan

आमतौर पर आप मंदिर (mandir) जाते हो तो भगवान् के दर्शन जरूर करते हो लेकिन शायद आपको यह नहीं पता की मंदिर में भगवान् की (back of lord krishna)  पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए | अब आप सोच रहे होंगे की भगवान् (god)  की पीठ के दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए तो इसी को लेकर हम आपको एक रोचक कहानी (interesting story) बताते है|

जब भी कृष्ण भगवान के मंदिर (temple of god) जाएं तो यह जरुर ध्यान रखें कि कृष्ण जी कि मूर्ति की पीठ के दर्शन ना करें। दरअसल पीठ के दर्शन न करने के संबंध में भगवान विष्णु (bhagwan vishnu ji) के अवतार श्रीकृष्ण की एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण जरासंध से युद्ध (fighting with jarasandh) कर रहे थे तब जरासंध का एक साथी असूर कालयवन (kaalyavan) भी भगवान से युद्ध करने आ पहुंचा। कालयवन श्रीकृष्ण के सामने पहुंचकर ललकारने (shouting) लगा। तब श्रीकृष्ण (sri krishan) वहां से भाग निकले। इस तरह रणभूमि से भागने (running) के कारण ही उनका नाम रणछोड़ पड़ा।

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जब श्रीकृष्ण भाग र(running) हे थे तब कालयवन भी उनके पीछे-पीछे भागने लगा। इस तरह भगवान (bhagwan) रणभूमि से भागे क्योंकि कालयवन के पिछले जन्मों (old birth) के पुण्य बहुत अधिक थे और कृष्ण किसी को भी तब तक सजा (punishment) नहीं देते जब कि पुण्य का बल शेष रहता है। कालयवन कृष्णा (shri krishan) की पीठ देखते हुए भागने लगा और इसी तरह उसका अधर्म बढऩे लगा क्योंकि भगवान की पीठ पर अधर्म का वास (place of bad things) होता है और उसके दर्शन करने से अधर्म बढ़ता है। 

जब कालयवन के पुण्य का प्रभाव खत्म (loss efefct) हो गया कृष्ण एक गुफा में चले गए। जहां मुचुकुंद नामक राजा (king) निद्रासन में था। मुचुकुंद को देवराज इंद्र (king indra) का वरदान था कि जो भी व्यक्ति राजा को निंद (sleep) से जगाएगा और राजा की नजर पढ़ते ही वह भस्म (dies) हो जाएगा। कालयवन ने मुचुकुंद को कृष्ण (shri krishna) समझकर उठा दिया और राजा की नजर पढ़ते ही राक्षस (rakshas) वहीं भस्म हो गया।

अत: भगवान श्री हरि की पीठ के दर्शन नहीं (Avoid watching back of krishan bhagwan) करने चाहिए क्योंकि इससे हमारे पुण्य कर्म का प्रभाव कम होता है (good work reduces) और अधर्म बढ़ता है। कृष्णजी के हमेशा ही मुख की ओर से ही दर्शन करें।

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