तेनालीराम रंगे हाथ पकड़े गए | Tenaliram Range Haath Pakde Gaye

तेनालीराम रंगे हाथ पकड़े गए | Tenaliram Range Haath Pakde Gaye

यह मुहावरा सदियों से चला आ रहा है : ”रंगे हाथों पकड़े जाना ।” आखिर ये मुहावरा कब और कैसे बना ? हमारा खयाल है कि इस घटना के बाद ही यह बना होगा-एक दिन दरबार (darbar) की कार्यवाही चल रही थी कि नगर सेठ वहां उपस्थित होकर दुहाई देने लगा : ”महाराज (maharaj)! मैं मर गया…बरबाद हो गया-कल रात चोर मेरी तिजोरी का ताला तोड़कर सारा धन (money) चुराकर ले गए । हाय…मैं लुट गया ।”

महाराज (maharaj) ने तुरन्त कोतवाल (jailer) को तलब किया और इस घटना के बारे में पूछा । कोतवाल (jailer) ने बताया : ”महाराज (maharaj)! हम कार्यवाही कर रहे हैं मगर चोरों का कोई सुराग नहीं मिला है ।” ”जैसे भी हो, वो शीघ्र ही पकड़ा जाना चाहिए ।” महाराज (maharaj) ने कोतवाल (jailer) को हिदायत देकर सेठ से कहा : ”सेठ जी आप निश्चित रहे-शीघ्र ही चोर को पकड़ लिया जाएगा ।”

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आश्वासन पाकर सेठ चला गया । उसी रात चोरों ने एक अन्य धनवान (money) व्यक्ति के घर चोरी (chori) कर ली । पुलिस की लाख मुस्तैदी के बाद भी चोर पकड़े न जा सके । और उसके बाद तो जैसे वहां चोरियों की बाढ़ सी आ गई । कभी कहीं चोरी (chori) हो जाती कभी कहीं ।

सभी चोरियां अमीर-उमरावों के यहाँ हो रही थीं । हर बार चोर साफ बचकर निकल जाते । शिकायतें सुन-सुनकर महाराज (maharaj) परेशान हो उठे । उन्होंने एक दिन क्रोध (angry) में अपने दरबारियों को खूब लताड़ा : ”क्या आप लोग यहां हमारी शक्ल देखने के लिए बैठे हैं-क्या कोई भी दरबारी (darbari) चोर को पकड़ने की युक्ति नहीं सुझा सकता ।”

सभी दरबारी (darbari) चुप बैठे रहे । क्या करें ? जब कोतवाल (jailer) जैसा अनुभवी व्यक्ति चोरों को नहीं पकड़ पा रहा तो कोई दरबारी (darbari) भला कैसे पकड़ सकता था । किन्तु तेनालीराम (tenaliram) को बात खटक गई । वह अपने स्थान से उठकर बोला : ” महाराज (maharaj)! मैं पकड़ेगा इस चोर को ।”

उसी दिन तेनालीराम (tenaliram) शहर के प्रमुख जौहरी की दुकान पर गया । उससे कुछ बातें कीं, फिर अपने घर आ गया । अगले ही दिन जौहरी की ओर से एक प्रदर्शनी की मुनादी कराई गई जिसमें वह अपने सबसे कीमती आभूषणों और हीरों को प्रदर्शित करेगा । प्रदर्शनी लगी और लोग उसे देखने के लिए टूट पड़े ।

एक से बढ़कर एक कीमती हीरे और हीरों के आभूषण प्रदर्शित किए गए थे । रात को जौहरी ने सारे आभूषण व हीरे एक तिजोरी में बंद करके ताला लगा दिया जैसा कि होना ही था-रात को चोर आ धमके । ताला तोड़कर उन्होंने सारे आभूषण और हीरे एक थैली में भरे और चलते बने ।

इधर चोर दुकान से बाहर निकले, उधर जौहरी ने शोर मचा दिया । देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में जाग हो गई । चोर माल इधर-उधर डालकर लोगों की भीड़ में शामिल हो गए । मगर तभी सिपाहियों की टुकड़ी के साथ तेनालीराम (tenaliram) वहां पहुंच गए और सिपाहियों ने पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी कर ली ।

तेनालीराम (tenaliram) ने कहा : ”सब की तलाशी लेने की आवश्यकता नहीं है, जिनके हाथ और वस्त्र रंगे हुए हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए वे ही चोर हैं ।” और इस प्रकार आनन-फानन में चोर पकड़े गए । अगले दिन उन्हें दरबार (darbar) में पेश किया गया । महाराज (maharaj) ने देखा कि चोरों के हाथ और वस्त्र लाल रंग में रंगे हुए हैं ।

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”इनके हाथों पर ये रंग कैसा है तेनालीराम (tenaliram) ।” ”महाराज (maharaj)! तिजोरी में माल रख ने से पहले उसे लाल रंग से रंगा गया था-इसी कारण इनके हाथ रंगे हुए हैं । इसी को कहते हैं, चोरी (chori) करते रंगे हाथों पकड़ना ।” ”वाह!” महाराज (maharaj) तेनालीराम (tenaliram) की प्रशंसा किए बिना न रह सके, फिर उन्होंने चोरों को आजीवन कारावास का दण्ड सुनाया ताकि वे जीवन में फिर कभी चोरी (chori) न कर सकें ।

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